Mukti Mod News

सच की रहा पर सबसे आगे

गुरुकुल कांगड़ी में आर्य वीर-वीरांगना शिविर का भव्य समापन: गूंजा राष्ट्र सेवा और वैदिक संस्कृति का संकल्प

1 min read
Listen to this article

गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में सप्ताह भर चले आर्य वीर एवं आर्या वीरांगना शिविर का भव्य समापन समारोह सम्पन्न हुआ। आर्य दीक्षान्त एवं समापन समारोह के अवसर पर सार्वदेशिक आर्य वीर दल दिल्ली एवं शिविर प्रशिक्षण व्यवस्थापक बृहस्पति आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन पद्धति सरल, सात्विक तथा सहयोग वाली होनी चाहिए। यह विचारधारा समाज की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। मातृवान, पितृवान, आचार्यवान संतान ही भारत को सुरक्षित रख सकती है। कार्यक्रम का शुभारम्भ ध्वजारोहण एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरम्भ हुआ। वैदिक विद्वान डा0 योगेश भारद्वाज ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति के साथ जुड़ाव व्यक्ति में संवेदनाओं को जागृत करता है। उन्होंने आर्य वीरों का आह्वान किया कि जीवन में आर्य समाज व गुरुकुल की विचारधारा को प्रबल बनाए रखने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहना होगा। भौतिक एवं अध्यात्म में रुचि रखने वाले वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो0 एल0पी0 पुरोहित ने आर्य समाज को जनक्रान्ति का संवाहक बताते हुए आर्य वीर दल जैसे आयोजनों को प्रमुखता से आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं में सोचने व समझने की शक्ति सीमित होती जा रही है जिसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिम्मेदार है। कार्यक्रम को उत्तराखण्ड आर्य समाज के विचारक डा0 श्याम सिंह ने भी संबोधित किया। उन्होंने आर्य वीर एवं आर्या वीरांगनाओं को आर्य समाज की पौध बताया। उन्होंने परिवार तथा रिश्ते बचाने, गले लगाने की परम्परा को बढ़ावा देने तथा शस्त्र के साथ शास्त्र की शिक्षा को अनिवार्य बताया। कार्यक्रम में दीक्षित आर्य वीर तथा आर्या वीरांगनाओं को प्रशिक्षण प्रदान करने वाले प्रशिक्षक धर्मवीर आर्य के निर्देशन में नानचाक तथा तलवार संचालन, फरसा संचालन, दण्ड संचालन तथा पिरामिड व स्तूप की संरचना बनाकर उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलसचिव प्रो0 सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि लाठी राष्ट्र की ढाल है। शौर्य यदि सो गया तो युवाओं व राष्ट्र की सुरक्षा पर संकट आ जाएगा जिसका दंश गुलामी के लंबे कालखंड में देश झेल चुका है। देश की अस्मिता को बचाने के लिए आर्या वीरांगनाओं का बलिदान भी कम आंका नहीं जा सकता। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र सेवा व वैदिक ज्ञान परम्परा की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नए रक्त का संचार ही देश की सुरक्षा की गारंटी है। कार्यक्रम में दीक्षित हुए आर्य वीर तथा आर्या वीरांगनाओं को प्रशस्ति पत्र तथा वैदिक साहित्य भेंट कर अतिथियों द्वारा प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम डा0 संदीप वेदालंकार, डा0 अंकित तथा डा0 मनोज के संयोजन में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर प्रो0 नवनीत, प्रो0 लक्ष्मी प्रसाद पुरोहित, प्रो0 अरुण कुमार, प्रो0 नितिन काम्बोज, डा0 वीरेन्द्र सिंह, डा0 पवन आर्य, डा0 संजील कुमार, डा0 मयंक पोखरियाल, डा0 अजय मलिक, डा0 शिव कुमार चौहान, डा0 भारत वेदालंकार, डा0 विपिन कुमार शर्मा, डा0 दीपिका, डा0 विपिन बालियान, डा0 विकास राणा, दुष्यंत राणा, कुलभूषण शर्मा, डा0 प्रणवीर सिंह, राधेश्याम, हेमन्त सिंह नेगी, मनोज कुमार, विकास कुमार, नीरज बिरला, रूपेश पन्त, ओमेन्द्र, किशन कुमार, मुकेश कपिल, आशीष धमान्दा, सुनील भगत, विनोद, अमन त्यागी, मुकेश त्यागी, सुशील रौतेला, वीरेन्द्र पटवाल, अमित धीमान, धर्मेन्द्र बिष्ट, आशीष थपलियाल, उमेश बिष्ट, नवीन आदि उपस्थित रहे।

About Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *