हरिद्वार खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने सत्र के अंतिम दिन क्यों दिया इस्तीफा?
1 min readउत्तराखंड विधानसभा सत्र के अंतिम दिन राजनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सत्र का आखिरी दिन पहले ही विभिन्न मुद्दों को लेकर गर्म था, लेकिन विधायक के इस फैसले ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नई सियासी बहस को जन्म दे दिया। विधानसभा सत्र के आखिरी दिन इस्तीफा सौंपने के बाद सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया और सत्ता पक्ष (भाजपा) तथा मुख्य विपक्षी दल (कांग्रेस) के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
विधानसभा परिसर में फोटो शूट के दौरान भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों और विधायकों ने उमेश कुमार के इस्तीफे पर हल्के-फुल्के अंदाज में चुहलबाजी की। मंत्री गणेश जोशी ने मजाक करते हुए कहा कि उमेश कुमार मीडिया में जाकर बयान दे दें कि वे मंत्रियों और विधायकों के दबाव में आकर अपना इस्तीफा वापस ले रहे हैं। इस सुझाव पर भाजपा विधायक भरत चौधरी ने चुटकी लेते हुए कहा कि सबकी ऐसी सहमति नहीं है, वहीं मंत्री सौरभ बहुगुणा ने मजाकिया लहजे में कहा कि इस्तीफा देने दो।
इस्तीफे के बाद उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए विधायक उमेश कुमार ने स्थिति स्पष्ट की और कहा कि उन्होंने किसी के दबाव में आकर इस्तीफा नहीं दिया है। हरिद्वार और किसानों से जुड़े अहम मुद्दों पर जब उन्होंने आवाज उठानी चाही, तो विपक्ष ने उनका सहयोग नहीं किया। अपनी राजनीतिक निष्ठा पर बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि वे न तो भाजपा में शामिल होंगे और न ही कांग्रेस में जाएँगे। दूसरी ओर, उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि त्यागपत्र का नियमानुसार परीक्षण किया जा रहा है और सभी वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
कांग्रेस ने उमेश कुमार के इस कदम को महज एक राजनीतिक बयानबाजी करार दिया और उन पर किसानों के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि किसानों की चिंता करना अच्छी बात है, लेकिन राजनीति करने से पहले उमेश कुमार को अपने पूरे कार्यकाल में किसानों के हित में किए गए कार्यों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उमेश कुमार जनहित के मुद्दों को हल करने के बजाय व्यक्तिगत विवादों में उलझे रहे और याद दिलाया कि कांग्रेस ने किसान आंदोलन तथा उनके हितों के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया है। इसके अलावा, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष राजीव महर्षि ने कहा कि उमेश कुमार की यह बयानबाजी भाजपा के इशारे पर हो रही है और उनके इस कदम का असली उद्देश्य भाजपा की राजनीति को फायदा पहुँचाना है।
कांग्रेस के इन आरोपों का जवाब देते हुए उमेश कुमार ने दोहराया कि उन्होंने जनहित और किसानों के मुद्दों पर हमेशा विपक्ष के साथ खड़े होने का प्रयास किया, लेकिन कांग्रेसी विधायकों ने उनका साथ नहीं दिया। उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वे किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो रहे हैं।


