Mukti Mod News

सच की रहा पर सबसे आगे

कावड़ मेला 2025: ईश्वरीय कृपा और कुशल प्रबंधन से सफल समापन

1 min read
Listen to this article

कावड़ मेला 2025 सकुशल संपन्न होने पर बधाई!
वरिष्ठ पत्रकार आदेश त्यागी जी ने हरिद्वार और कावड़ मेले से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। यहाँ आपकी जानकारी को एक रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूं:

हरिद्वार: मोक्षदायिनी मां गंगा के पावन तट पर और भोलेनाथ महादेव की असीम कृपा से, कावड़ मेला 2025 सकुशल संपन्न हो गया है। ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय भोलेनाथ’ के निरंतर उद्घोष से गूँजती धर्मनगरी में लाखों शिवभक्तों ने अपनी आस्था प्रकट की। इस विराट आयोजन का निर्विघ्न समापन निश्चित रूप से ईश्वरीय अनुकंपा और सुदृढ़ भीड़ प्रबंधन का परिणाम है।
हरिद्वार की किंवदंती और 1996 की त्रासदी
हरिद्वार को लेकर एक पुरानी किंवदंती है, जो यहाँ तैनात अधिकारियों को हमेशा याद रखनी चाहिए: “रात रात में पत्थर के आदमी बन जाते हैं!” यह कहावत अचानक बढ़ने वाली भीड़ और उसके प्रबंधन की चुनौतियों को दर्शाती है।
बात 16 जुलाई 1996 की है, जब सोमवती अमावस्या का स्नान था। एक दिन पहले तक हरिद्वार में सामान्य भीड़ थी, लेकिन सोमवती अमावस्या पर तीर्थयात्रियों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि हरकी पैड़ी के समीप हाथी वाले पुल पर भगदड़ मच गई। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 21 तीर्थयात्रियों की मृत्यु हो गई थी। तत्कालीन हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार थे, और सरकार ने इस घटना की जांच के लिए राधा कृष्ण अग्रवाल आयोग का गठन किया था। यह मां गंगा और ईश्वरीय कृपा ही कही जाएगी कि अपने सेवाकाल में दो आयोगों का सामना करने वाले “खाकी में इंसान” आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक के पद को सुशोभित कर सेवानिवृत्त हुए।
बजट बनाम भव्यता: अर्द्ध कुंभ 2027 की तैयारियां
कावड़ मेला 2025 कुछ खट्टी-मीठी यादों के साथ संपन्न हुआ है, जिसने यह भी दर्शाया कि कम बजट में भी बड़े आयोजन सफलतापूर्वक हो सकते हैं। हालांकि, अर्द्ध कुंभ मेला 2027 के लिए केंद्र सरकार से ₹3500 करोड़ के भारी-भरकम बजट की मांग की गई है।
यह उल्लेखनीय है कि अर्द्ध कुंभ मेला 1992 का बजट महज ₹32 करोड़ था। उस समय कुंभ मेला अधिकारी राजीव गुप्ता और मेला प्रभारी, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सिंचाई मंत्री पृथ्वी सिंह विकसित जी की ईमानदारी की मिसाल थी कि सिर्फ ₹28 करोड़ ही खर्च हो सके थे। यह अतीत हमें बड़े आयोजनों में वित्तीय प्रबंधन की सीख देता है।
सफल आयोजन के लिए बधाई के पात्र
इस सफल मेले के लिए उत्तराखंड के धाकड़ मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव आनंदवर्धन, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल, हरिद्वार की रग-रग से वाकिफ पुलिस अधीक्षक नगर पंकज गैरोला सहित सभी अधिकारी, पुलिसकर्मी और कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। उनकी अथक मेहनत और समन्वय ने इस विशाल आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अनुत्तरित प्रश्न और आगे की राह
हालांकि, मेले के सकुशल संपन्न होने के बाद हमेशा कुछ अनुत्तरित सवाल रह जाते हैं, जिनका जवाब सत्ता और अधिकारी अक्सर देना नहीं चाहते। धर्म और सनातन की आड़ में जो अराजकता और नियमों के खुले उल्लंघन की छूट कांवड़ियों को दी जाती है, उसकी कीमत चार दिन बाद नगरवासियों को ही चुकानी पड़ती है। गंदगी और अव्यवस्था का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ता है।
जिलाधिकारी और नगर आयुक्त महोदय से आग्रह है कि वे शहर की सफाई और कीटनाशकों के छिड़काव को युद्ध स्तर पर कराने हेतु अपने मातहतों को निर्देशित करें, ताकि शहरवासियों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन मिल सके और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचाया जा सके।

About Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *