नेपाल त्रासदी: अखाड़ा परिषद का बड़ा ऐलान, संतों ने बढ़ाई सहायता राशि, अब जिलाधिकारी के जरिए भेजी जाएगी मदद
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हरिद्वार:
नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए हरिद्वार के संत समाज ने एक मानवतावादी मिसाल पेश की है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (रजि) की अगुवाई में बड़ा उदासीन अखाड़े में बुलाई गई एक आपात बैठक में नेपाल के पीड़ितों के लिए 51 लाख रुपये की सहायता राशि भेजने का बड़ा निर्णय लिया गया है।
मात्र 30 मिनट में जुटे 38 लाख रुपये
गुरुवार को आयोजित इस आपात बैठक में विभिन्न अखाड़ों और आश्रमों के संत-महंतों ने खुलकर आर्थिक सहयोग देने का संकल्प लिया। बैठक के दौरान महज आधे घंटे के भीतर ही लगभग 38 लाख रुपये की राशि एकत्रित कर ली गई। अखाड़ा परिषद ने अन्य अखाड़ों, आश्रमों और धार्मिक-सामाजिक संगठनों से संपर्क कर इस राशि को बढ़ाकर 51 लाख रुपये करने का लक्ष्य रखा है। यह पूरी मदद जिलाधिकारी के माध्यम से नेपाल भेजी जाएगी ताकि वह सही समय पर जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
”पड़ोसी देश की आपदा हमारी अपनी आपदा”
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व महानिर्वाणी अखाड़े के श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि नेपाल की त्रासदी से पूरा संत समाज व्यथित है। कुंभ की तैयारियों से भी पहले मानवता को प्राथमिकता देते हुए संतों ने नेपाल की हरसंभव मदद का संकल्प लिया है।
इस मानवीय पहल में अखाड़ा परिषद के मीडिया संयोजक करौली शंकर महाराज ने व्यक्तिगत रूप से 11 लाख रुपये का बड़ा योगदान दिया। उन्होंने कहा, “जब पड़ोसी देश संकट में हो, तो वह हमारे अपने शरीर का हिस्सा जलने जैसा है। संकट की इस घड़ी में संत समाज पूरी ताकत के साथ नेपाल के साथ खड़ा है।”
संकट के समय हमेशा आगे रहा है संत समाज
गरीबदासी आश्रम के स्वामी रविदेव शास्त्री और बड़ा उदासीन अखाड़े के मुखिया महंत राम मुनि दास ने कहा कि देश हो या विदेश, जब भी कोई बड़ी आपदा आती है, संत समाज ने हमेशा सबसे आगे आकर मानवता की सेवा की है। संतों का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि पीड़ित मानवता की रक्षा करना भी है।
