हरिद्वार में रामलीला की रंगत: रक्षाबंधन के बाद रिहर्सल शुरू, बदला मंचन का अंदाज़
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हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में रामलीला मंचन का इतिहास डेढ़ शताब्दी से भी अधिक पुराना है। कभी ब्रिटिश शासनकाल में जिस रामलीला के आयोजन के लिए अंग्रेजी हुकूमत से बाकायदा अनुमति लेनी पड़ती थी, आज वही परंपरा शहर के दर्जनों स्थानों पर पूरी भव्यता के साथ जीवंत हो रही है।
आमतौर पर रक्षाबंधन का पर्व बीतते ही धर्मनगरी में रामलीला की तैयारियां जोर पकड़ने लगती हैं। विभिन्न नाट्य मंडलियों द्वारा कलाकारों का चयन कर उन्हें मंचन का गहन पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) कराना शुरू कर दिया जाता है। इस दौरान रामलीला प्रेमी न केवल मुख्य मंचन, बल्कि इन रिहर्सल बैठकों में भी पहुंचकर कलाकारों के अभिनय का आनंद लेते हैं।
समय के साथ रामलीला के स्वरूप में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। एक दौर था जब हरिद्वार की रामलीलाएं पूरी तरह से रामायण की पारंपरिक चौपाइयों और दोहों पर आधारित होती थीं। हालांकि, अब बदलते समय और दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने इसमें नयापन जोड़ा है। अब चौपाइयों के साथ-साथ फिल्मी गीतों की धुनों और आधुनिक संगीत का समावेश कर रामलीला को और अधिक आकर्षक बनाया जा रहा है।
वर्तमान में शहर के अनेक क्षेत्रों में रिहर्सल का दौर शुरू हो चुका है, जिससे पूरा माहौल राममय होने लगा है।
