गायत्री जयंती महापर्व: राष्ट्र निर्माण का संकल्प और डॉ. चिन्मय पंड्या का ‘जागने’ का आह्वान
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हरिद्वार: गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में चल रहे तीन दिवसीय गायत्री जयंती महापर्व में हजारों श्रद्धालुओं ने राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण का संकल्प लिया। महापर्व के दूसरे दिन चौबीस घंटे के अखंड जप का शुभारंभ हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए साधकों ने देश की अखंडता और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
गायत्री जयंती की पूर्व संध्या पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि “यह समय जागने व जगाने का है।” उन्होंने युवाओं से ईमानदारी, समझदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी के साथ देश की अखंडता, समृद्धि और सामाजिक समरसता के लिए कार्य करने का आह्वान किया।
महिला मंडल की प्रमुख शैफाली पंड्या ने बताया कि माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी और सिद्ध अखंड दीपक का शताब्दी वर्ष २०२६ में उत्साहपूर्वक मनाया जाएगा, जिसके तहत ज्योति कलश यात्राएं निकाली जा रही हैं। व्यवस्थापक श्री योगेंद्र गिरि ने शांतिकुंज की स्थापना और चौबीसों घंटे चलने वाले गायत्री महामंत्र के अनुष्ठान के बारे में जानकारी दी।
महापर्व में सांस्कृतिक कार्यक्रम, गायत्री महायज्ञ, सत्संग और प्रवचन जैसे आयोजन हुए। शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार, मुख्य कार्यक्रम गुरुवार को होगा, जिसमें अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पंड्या और श्रद्धेया शैलदीदी सैकड़ों नव साधकों को गायत्री मंत्र दीक्षा देंगे, साथ ही विभिन्न संस्कार निःशुल्क संपन्न कराए जाएंगे।
नमो।
