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पूरी मानवता के लिए सूर्याेदय होने जा रहा है: डॉ. चिन्मय पण्ड्या
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा है कि यह समय पूरी मानवता के लिए एक नवचेतना के सूर्याेदय का संकेत दे रहा है। उन्होंने माता भगवती देवी शर्मा जी की जन्मशताब्दी और अखण्ड दीपक प्रकाट्य के शताब्दी वर्ष (2026) के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं की जानकारी देने हेतु आयोजित एक वर्चुअल मीटिंग को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस बैठक में भारत सहित 25 देशों के गायत्री परिजनों ने भाग लिया। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि शांतिकुंज की टीमें भारत सहित अनेक देशों में सघन जनसंपर्क करेंगी। जन्मशताब्दी वर्ष का पहला चरण जनवरी 2026 में हरिद्वार में और दूसरा नवंबर 2026 में होगा, तथा 2030 तक प्रतिवर्ष ऐसे आयोजन होंगे। ज्योति कलश यात्राएँ भारत के साथ-साथ दुबई, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इंग्लैंड, लिथुआनिया, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों में भी निकाली जा रही हैं, जो जनवरी 2026 में शांतिकुंज लौटेंगी।
संगम सेवा ट्रस्ट ने पुष्पवर्षा कर किया कांवड़ियों का स्वागत
संगम सेवा ट्रस्ट के जिलाध्यक्ष जटाशंकर श्रीवास्तव के नेतृत्व में ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बहादराबाद बाईपास पर कांवड़ लेकर लौट रहे शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्हें पेयजल, फल, बिस्किट आदि वितरित कर मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दी गईं। जटाशंकर श्रीवास्तव ने कहा कि कठिन पैदल यात्रा करने वाले करोड़ों शिवभक्त भगवान शिव का ही स्वरूप हैं और सभी को अपनी सामर्थ्य के अनुसार शिवभक्तों की सेवा में सहयोग करना चाहिए।
श्रावण में कांवड़ियों की सेवा का है बहुत महत्व – श्रीमहंत बिष्णु दास महाराज
श्रीगुरू सेवक निवास उछाली आश्रम में कांवड़ियों के लिए सेवा शिविर लगातार जारी है। 12 जुलाई से शुरू हुए इस शिविर में प्रतिदिन हजारों शिवभक्तों को प्रसाद, भोजन, चाय, नाश्ता और पानी नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। आश्रम के परमाध्यक्ष श्रीमहंत बिष्णु दास महाराज स्वयं श्रद्धालुओं को भोजन प्रसाद उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में कांवड़ियों की सेवा का बहुत महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस सेवा के माध्यम से न केवल धार्मिक कर्तव्यों का पालन होता है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और सेवा की भावना को भी बढ़ावा मिलता है। शिविर में भोजन ग्रहण करने आने वाले कांवड़ियों को गंगाजी की स्वच्छता और मेला नियमों का पालन करने का भी आह्वान किया जा रहा है।
दशनाम गोस्वामी समाज ने किया अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज का स्वागत

विश्वगुरु शंकराचार्य दसनाम गोस्वामी समाज के राष्ट्रीय महासचिव प्रमोद गिरि के आग्रह पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष और पंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने दशनाम गोस्वामी अखाड़ा को अपनी स्वीकृति प्रदान की है। श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि गोस्वामी समाज आदिगुरु शंकराचार्य की परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है और उनके देश भर में बड़े-बड़े मठ-मंदिर हैं। उन्होंने बताया कि अब प्रत्येक कुंभ में दशनाम गोस्वामी अखाड़ा निरंजनी अखाड़े के साथ सहभागी बनकर देश के कुंभ मेले में शामिल होगा। इस अवसर पर प्रमोद गिरि गोस्वामी सहित अन्य पदाधिकारियों ने श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज का माल्यार्पण कर आभार व्यक्त किया।
