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सच की रहा पर सबसे आगे

सनातन परम्परा, अखाड़ा व्यवस्था एवं आगामी कुम्भ के संदर्भ में विचार-विमर्श किया

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हरिद्वार:   अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने श्री दक्षिण काली मंदिर पहुुंचकर लंबे प्रवास के बाद हरिद्वार लौटे निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द गिरि महाराज से भेंट की। भेंट के दौरान स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज एवं श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने सनातन परम्परा,अखाड़ा व्यवस्था एवं आगामी कुम्भ के संदर्भ में विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी राघवेंद्र भारती महाराज भी मौजूद रहे।स्वामी कैलाशानन्द गिरि महाराज एवं श्रीमहंत रविन्द्र पूरी महाराज ने पूर्व में संपन्न हुई अखाड़ों की बैठकों, अखाड़ा परिषद के निर्णयों तथा वर्तमान में अखाड़ों के समक्ष उपस्थित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की और अखाड़ों की एकता,सनातन परम्पराओं की रक्षा,संत समाज की भूमिका तथा धार्मिक आयोजनों के सुव्यवस्थित संचालन पर विशेष बल दिया। इस दौरान हरिद्वार कुम्भ को लेकर भी गहन चर्चा हुई। कुम्भ मेले को और अधिक दिव्य एवं भव्य स्वरूप प्रदान करने हेतु सरकार द्वारा किए जा रहे विकासात्मक एवं व्यवस्थागत कार्यों की भी समीक्षा की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा,सुरक्षा,स्वच्छता,यातायात व्यवस्था तथा संत-महात्माओं के लिए आवश्यक संसाधनों को लेकर भी विचार किया।अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी एवं निरंजनी पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि सभी अखाड़ों के समन्वय,सहयोग एवं सहभागिता से हरिद्वार कुम्भ मेले को पारंपरिक गरिमा के अनुरूप भव्य और दिव्य स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। कुम्भ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की वैश्विक पहचान है,जिसे दिव्यता,भव्यता और अनुशासन के साथ सम्पन्न करना समस्त संत समाज का दायित्व है।

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