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अधिवक्ता ने SSP को लिखा पत्र: संत सुधानन्द को साजिश के तहत फंसाने का आरोप

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हरिद्वार: मातृ सदन आश्रम के संत ब्रह्मचारी सुधानन्द के खिलाफ थाना कनखल में दर्ज मुकदमे को अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने एक गहरी साजिश करार दिया है। SSP हरिद्वार को भेजे शिकायती पत्र में अधिवक्ता ने दावा किया है कि संत पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से फंसाया गया है।

प्रमुख आरोप और घटनाक्रम:

  • प्रशासनिक बुलावा: पत्र के अनुसार, 27 जनवरी 2026 को हल्का पटवारी ने संत सुधानन्द को फोन कर अगले दिन अवैध निर्माण स्थल पर ‘पैमाइश’ के लिए बुलाया था।
  • पूर्व नियोजित हमला: आरोप है कि 28 जनवरी को जब संत वहां पहुंचे, तो अतुल चौहान और उनके साथियों ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। अधिवक्ता का तर्क है कि संत वहां स्वयं की इच्छा से नहीं, बल्कि प्रशासन के बुलावे पर गए थे।
  • भेदभावपूर्ण जांच: अधिवक्ता ने सवाल उठाया है कि विवेचक ने केवल संत का नाम मुकदमे में क्यों डाला, जबकि मौके पर तहसीलदार, लेखपाल और अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे।

न्याय की मांग:

अधिवक्ता भदौरिया ने SSP से मांग की है कि इस बात की गहन जांच हो कि किसके इशारे पर संत को घटनास्थल पर बुलाया गया था। उन्होंने इस षड्यंत्र में शामिल प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और संत सुधानन्द को न्याय दिलाने की अपील की है।

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