मानव-वन्यजीव संघर्ष पर लगाम: उत्तराखंड वन विभाग अब AI आधारित सेंसर कैमरों का करेगा इस्तेमाल
1 min readहरिद्वार/देहरादून:
उत्तराखंड में मानव और वन्यजीवों के बीच लगातार बढ़ रहे संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने एक अत्याधुनिक पहल की तैयारी की है। तकनीक का सहारा लेते हुए विभाग अब आबादी वाले क्षेत्रों में वन्यजीवों की घुसपैठ रोकने के लिए ‘एआई (AI) सेंसर ऑब्जेक्ट साउंड कैमरे’ तैनात करने जा रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और रिहायशी इलाकों में हाथियों, तेंदुओं और अन्य खतरनाक वन्यजीवों के प्रवेश को पहले ही चरण में रोकना है।
कैसे काम करेगी यह AI तकनीक?
वन विभाग के अनुसार, ये कैमरे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और अत्याधुनिक सेंसर तकनीक से लैस हैं:
- 50 मीटर की रेंज: एआई सेंसर कैमरे अपने आसपास लगभग 50 मीटर के दायरे में किसी भी वन्यजीव की गतिविधि का सटीक पता लगाने में सक्षम हैं।
- स्वचालित चेतावनी प्रणाली: जैसे ही कोई हाथी, तेंदुआ, हिरण, नीलगाय या अन्य वन्यजीव कैमरे की रेंज में आएगा, यह डिवाइस सक्रिय हो जाएगा।
- जानवरों की आवाज में चेतावनी: सेंसर ट्रिगर होते ही डिवाइस संबंधित वन्यजीव की प्रजाति के अनुसार विशिष्ट आवाजें निकालेगा। इस प्राकृतिक चेतावनी ध्वनि के प्रभाव से वन्यजीव रिहायशी बस्तियों या खेतों की ओर बढ़ने के बजाय वापस जंगल की दिशा में लौट जाएंगे।
तकनीक से सुरक्षा और राहत की उम्मीद
उत्तराखंड के मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से हाथियों और तेंदुओं का आबादी वाले इलाकों में आना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इससे न केवल जान-माल का नुकसान होता है, बल्कि किसानों की फसलें भी नष्ट होती हैं।
वन विभाग को उम्मीद है कि इस AI आधारित ध्वनि-सेंसर कैमरे के प्रयोग से बिना जानवरों को नुकसान पहुंचाए उन्हें बस्तियों से दूर रखा जा सकेगा। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे राज्य के अन्य संवेदनशील और सीमावर्ती जंगल क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा।
