कलयुग में नाम जप ही मुक्ति का साधन: रामेश्वरानंद
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हरिद्वार के श्री रामेश्वर आश्रम कनखल में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि कलयुग में भगवान का नाम जप ही मुक्ति का एकमात्र साधन है। उन्होंने बताया कि नाम जप से मनुष्य के पाप कट जाते हैं और वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर आनंद व शांति प्राप्त करता है।
कथा के दौरान, स्वामी रामेश्वरानंद ने सती अनुसूया और राजा दक्ष के यज्ञ का प्रसंग सुनाया। इसके बाद उन्होंने ध्रुव की कथा का वर्णन किया, जिसमें राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को विमाता सुरुचि द्वारा अपमानित किए जाने पर अपनी माँ सुनीति की सलाह पर भगवान नारायण की भक्ति में लीन होने की प्रेरणा मिली।
महाराज ने इस बात पर जोर दिया कि भक्ति मार्ग पर चलना सरल नहीं है और इस पर केवल वही टिक सकता है जिसमें सच्ची श्रद्धा और धैर्य हो। उन्होंने भक्त प्रहलाद का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार अनेक कष्ट सहने के बावजूद उनकी भक्ति कम नहीं हुई और भगवान नरसिंह ने प्रकट होकर उनकी रक्षा की। उन्होंने यह भी बताया कि प्रहलाद को गर्भ में ही ब्रह्मज्ञान प्राप्त हो गया था। कथा के समापन पर हुए भजनों पर श्रद्धालुओं ने खूब आनंद लिया। इस अवसर पर भारी संख्या में ग्रामीण और भागवत प्रेमी उपस्थित थे। कथा की व्यवस्था डा. रजनीकांत शुक्ल ने की। इस अवसर पर राजकुमार चौहान, शिवम् चौहान, अमीर चौहान समेत सैंकड़ों भागवत प्रेमी मौजूद रहे।
