कलयुग के श्रवण कुमार संजू बाबा: माँ को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से अलीगढ़ की पदयात्रा
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हरिद्वार,(रामेश्वर गॉड): आज के स्वार्थी दौर में जब बच्चे अपने माता-पिता को बोझ समझने लगे हैं, अलीगढ़ के बिलखोरा गाँव निवासी संजू बाबा ने श्रवण कुमार की परंपरा को जीवित कर एक मिसाल कायम की है। वे न केवल भगवान शिव के लिए गंगाजल से भरी कांवड़ उठाए हुए हैं, बल्कि उसी कांवड़ में अपनी माँ श्रीमती पुष्पा देवी को भी बिठाकर हरिद्वार से अलीगढ़ तक की पदयात्रा कर रहे हैं।
यह यात्रा मात्र भक्ति नहीं, बल्कि संस्कार, समर्पण और सेवा का अद्भुत उदाहरण है। स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ से बात करते हुए संजू बाबा ने कहा, “सेवा दिखावे के लिए नहीं होती… माँ ही भगवान हैं।” उनका मानना है कि असली मंदिर माँ-बाप के चरणों में है और जो माँ को कांवड़ में नहीं बिठा सकते, वे मंदिर में घंटा बजाकर क्या पाएंगे।
इस अनोखी यात्रा पर बेटे के साथ बैठीं संजू की माँ पुष्पा देवी की आँखें नम थीं। उन्होंने कहा, “ऐसा बेटा सबको मिले। मेरी तो हर साँस में अब भगवान नहीं, मेरा बेटा है।” वे हर पड़ाव पर बेटे को “दूधों नहाओ, पूतों फलो” का आशीर्वाद दे रही थीं। संजू बाबा का कहना है कि उनके लिए उनके माता-पिता ही मंदिर हैं और उनकी भक्ति उस माँ की सेवा है, जिसने उन्हें जीवन दिया। यह दर्शाता है कि कलयुग में भी सतयुग की आत्मा जीवित है।
